शनिवार, 14 अगस्त 2010

धन प्राप्ति हेतु कुबेर मंत्र और यन्त्र साधना






















कुबेर देवताओं के कोषाध्यक्ष माने जाते है,उनकी साधना मानवेत्तर प्राणियों ने और देवताओं ने भी की है,शास्त्रों के अनुसार दारिद्रयहीन,भाग्यदोष निवारण,आर्थिक उन्नति,और जीवन की विषमताओं को दूर करने के लिये कुबेर यन्त्र और मन्त्र आश्चर्यजनक रूप से फ़लदायी है। उनके यंत्र और मंत्र पर शक करना अपने को ठगाने के समान है।
अधिकतर यह महादुर्लभ यंत्र सही तरीके से कोई भी स्वार्थपरता के कारण नही देता है,मैं आप लोगों को इस यंत्र को वास्तविक रूप से दे रहा हूँ,आशा है आप सभी इस यंत्र का लाभ प्राप्त करेंगे।
सर्वेगुणाकांचनम आश्रयन्ति
यह यन्त्र मन्त्र वेदों से प्रमाणित है,यह आगे चलकर मुझे अध्ययन करने के बाद पता चला,और प्रत्येक सदगृहस्थ के लिये उपयोगी है,तामसी वृत्तियों वाले कृपया इसका अनुसरण नही करें,और न ही लोभ से इसे अपने जीवन में अपनायें,अन्यथा लाभ की जगह पर हानि होने की अधिक संभावना मानी जा सकती है। इसका अनुसरण प्रत्येक स्त्री या पुरुष कर सकता है,अगर कोई व्यक्ति कम पढा लिखा है तो वह किसी योग्य लोभ रहित ब्राह्मण से यंत्र का निर्माण करवाकर मंत्रों का जाप करवा सकता है। या हमारे से बनवाकर मंगवा लें |

विधान
घर के अन्दर स्वच्छ स्थान पर या पूजा स्थान में लक्ष्मी माता का चित्र स्थापित कर लेना चाहिये,उसी के साथ अपने द्वारा पूजे जाने वाले या माने जाने वाले इष्ट या गुरु का चित्र स्थापित कर लें,इसके बाद लक्ष्मी का सुगंधित द्रव्य लेकर षोडशोपचार से पूजा करके लक्ष्मी का विष्णु सहित आवहान करना चाहिये,इसके साथ ही कुबेर यंत्र की स्थापना कर लेनी चाहिये,यंत्र अधिक प्रभावशाली है,इसी लिये कहा भी गया है कि इस यंत्र को पिता अपने तामसी बेटे को भी न दे,अन्यथा उसके कुल का विनाश हो सकता है। प्राचीनकाल में इसका स्थापन ऋषि मुनि अपने आश्रम में किया करते थे,और इसी की सहायता से हजारों शिष्यों और अतिथिओ की सेवा सुश्रूषा किया करते थे।

यन्त्र का विधान
इस यंत्र को किसी सुपात्र या अच्छे व्यक्ति से गुरु पक्ष या रवि पक्ष अथवा नवरात्रि में अथवा दिवाली या विजयकाल में बनाना चाहिये,फ़िर उसका यथोचित प्रकार से स्थापन किसी चौकी पर करना चाहिये,और उसे द्र्श्य रखने के लिये चौकी के ऊपर किसी प्लास्टिक की पन्नी को पूरी तरह से लपेट कर रखना चाहिये,जिससे आगे के समय में चूहों या घर के सदस्यों या बच्चों के द्वारा उसे खराब नही किया जा सके,साथ ही ध्यान रखना चाहिये कि कभी पूजा करते वक्त स्थापना किये स्थान से उसे हटाना नही चाहिये,और न ही उस चौकी के अन्दर किसी प्रकार की धक्का मुक्की हो,जिससे वह बनाया हुआ मंडल खराब न हो जाये। साफ़ सफ़ाई करने के लिये मोर पंखी का स्तेमाल करना चाहिये और हल्के से मोरपंखी से उस पर जमी धूल आदि को साफ़ करते रहना चाहिये।

यंत्र का निर्माण
निर्माण के लिये सामान इस प्रकार से है:-
एक चौकी आम की
एक सफ़ेद कपडा जो चौकी पर समतल रूप से बिछाया जा सके और चौकी के नीचे उसे सूतली से बांधा भी जा सके,चौकी भी इतनी बडी हो कि उसके अन्दर १८x१८ के चौके बनाये जा सकें।
काले रंग का धागा जिससे चौकी के ऊपर चौके बनाने की मार्किंग की जा सके।
सफ़ेद रंग के लिये चावल
हरे रंग के लिये मूंग
काले रंग के लिये काले उडद (माह)
लाल रंग के लिये मसूर की दाल
पीले रंग के लिये चने की दाल

दिये गये चित्र के अनुसार उसी रंग के अनाज को चौकी पर बने चौकों में भर दें।


इस को बनाने के बाद चौकी को जहां पर स्थाप्ति किया गया है,उसी चौकों के ऊपर उत्तर दिशा में सांप का आकार,पश्चिम में शंख का आकार,दक्षिण में गदा का आकार,और पूर्व में कमल के फ़ूल का आकार बना लेना चाहिये।

इस काम को करने के बाद इसे स्थापित करने का मंत्र आदि का पाठ करना चाहिये।

विनियोग
दाहिने हाथ में पुरुष और बायें हाथ में स्त्री जल लेकर इस मंत्र को पढे और मंत्र को पढने के बाद हाथ का पानी चौकी के चारों तरफ़ घडी की दिशा के अनुसार हाथ को घुमाकर छोड दे।

"ऊँ अस्य कुबेर मंत्रस्य विश्रवा ऋषि: बृहती छंद: शिवमित्र धनेश्वर देवता,दारिद्रय विनाशने पूर्णसमृद्धि सिद्धयर्थे जपे विनियोग:"।

ध्यान
विनियोग करने के बाद इस श्लोक को पढकर श्री कुबेर देवता का ध्यान करे-

"ऊँ मनुजबाहुविमान वरस्थितं गरुडरत्नाभिं निधिनायकम।
विवसखं मुकुटादिभूषितं वरगदे दधतं भज तुन्दिलम॥

अर्थ
मनुष्य की बाजुओं को विमान बनाकर उन के अन्दर यात्रा करने वाले,रत्नों से विभूषित गरुड को धारण करने वाले,संसार की सभी सम्पदाओं से युक्त विव के सखा,मुकुट आदि शुशोभित एक हाथ में गदा और और दूसरे से वर देने की मुद्रा के रूप में,धन के देने वाले तुन्दिल नाम कुबेर अन्तर्ज्ञान में रहें।

मन्त्र
ऊँ श्रीं ऊँ ह्रीं श्री ह्रीं क्लीं वित्तेश्वराय नम: स्वाहा।

दस हजार सुगन्धित ताजे फ़ूलों को लेकर इस मंत्र के जाप के साथ यंत्र को पुष्पांजलि देनी चाहिये,फ़िर इस मंत्र का सात लाख जाप सात दिन के समय में करना चाहिये,और आठवें दिन सात हजार बार घी,तिल,शहद,पंचमेवा,खीर,लौंग,जौ,सात अनाज मिलाकर आम की लकडी के साथ हवन करना चाहिये,इससे यह यंत्र सिद्ध हो जाता है।

कुबेर मंत्र
ऊँ यक्षाय कुबेराय वैश्रणवाय धनधान्यादिपतये धनधान्यसमृद्धि में देहि देहि दापय दापय स्वाहा।

इस मंत्र का यंत्र के सामने उत्तराभिमुख बैठ कर रोजाना पांच माला का जाप करना चाहिये,खूब संपत्ति आजाये फ़िर भी इस मंत्र को नही छोडना चाहिये,आठवें दिन ३५० मंत्रों की घी की आहुति देनी चाहिये।

यह यंत्र और मंत्र जीवन की सभी श्रेष्ठता को देने वाला,ऐश्वर्य,लक्षमी,दिव्यता,पद प्राप्ति,सुख सौभाग्य,व्यवसाय वृद्धि अष्ट सिद्धि,नव निधि,आर्थिक विकास,सन्तान सुख उत्तम स्वास्थ्य,आयु वृद्धि,और समस्त भौतिक और पराशुख देने में समर्थ है। लेकिन तुलसीदास की इस कहावत को नही भूलना चाहिये,"सकल पदारथ है जग माहीं,भाग्यहीन नर पावत नाहीं",जिनके भाग्य में लक्षमी सुख नही है,वे इसे ढकोसला और न जाने क्या क्या कह कर दरकिनार कर सकते हैं।

यंत्र को आप हमारे से बनवा भी सकते हैं

रविवार, 4 जुलाई 2010

अमोघ शिव कवच प्रयोग

अमोघ शिव कवच प्रयोग
मै आज सर्व साधारण व समस्त आस्तिक भक्तो के लाभार्थ अति प्राचीन सिद्धीप्रद अमोघ शिव कवच प्रयोग दे रहा हूँ | इसके शुद्ध सत्य अनुष्ठान से भयंकर से भयंकर विपत्ति से छुटकारा मिल जाता है और भगवान आशुतोष की कृपा हो जाती है |

अथ विनियोग:
अस्य श्री शिव कवच स्त्रोत्र मंत्रस्य ब्रह्मा ऋषि:, अनुष्टुप छंद:, श्री सदाशिव रुद्रो देवता, ह्रीं शक्ति:, रं कीलकम, श्रीं ह्रीं क्लीं बीजं, श्री सदाशिव प्रीत्यर्थे शिवकवच स्त्रोत्र जपे विनियोग: |

अथ न्यास: ( पहले सभी मंत्रो को बोलकर क्रम से करन्यास करे | तदुपरांत इन्ही मंत्रो से अंगन्यास करे| )

करन्यास
ॐ नमो भगवते ज्वलज्वालामालिने ॐ
ह्रां सर्वशक्तिधाम्ने इशानात्मने अन्गुष्ठाभ्याम नम: |
ॐ नमो भगवते ज्वलज्वालामालिने ॐ
नं रिं नित्यतृप्तिधाम्ने तत्पुरुषातमने तर्जनीभ्याम नम: |
ॐ नमो भगवते ज्वलज्वालामालिने ॐ
मं रूं अनादिशक्तिधाम्ने अधोरात्मने मध्यमाभ्याम नम:|
ॐ नमो भगवते ज्वलज्वालामालिने ॐ
शिं रैं स्वतंत्रशक्तिधाम्ने वामदेवात्मने अनामिकाभ्याम नम: |
ॐ नमो भगवते ज्वलज्वालामालिने ॐ
वां रौं अलुप्तशक्तिधाम्ने सद्योजातात्मने कनिष्ठिकाभ्याम नम: |
ॐ नमो भगवते ज्वलज्वालामालिने ॐ
यं र: अनादिशक्तिधाम्ने सर्वात्मने करतल करपृष्ठाभ्याम नम: |


अंगन्यास
ॐ नमो भगवते ज्वलज्वालामालिने ॐ
ह्रां सर्वशक्तिधाम्ने इशानात्मने हृदयाय नम: |
ॐ नमो भगवते ज्वलज्वालामालिने ॐ
नं रिं नित्यतृप्तिधाम्ने तत्पुरुषातमने शिरसे स्वाहा |
ॐ नमो भगवते ज्वलज्वालामालिने ॐ
मं रूं अनादिशक्तिधाम्ने अधोरात्मने शिखायै वषट |
ॐ नमो भगवते ज्वलज्वालामालिने ॐ
शिं रैं स्वतंत्रशक्तिधाम्ने वामदेवात्मने नेत्रत्रयाय वौषट |
ॐ नमो भगवते ज्वलज्वालामालिने ॐ
वां रौं अलुप्तशक्तिधाम्ने सद्योजातात्मने कवचाय हुम |
ॐ नमो भगवते ज्वलज्वालामालिने ॐ
यं र: अनादिशक्तिधाम्ने सर्वात्मने अस्त्राय फट |

अथ दिग्बन्धन:

ॐ भूर्भुव: स्व: |

ध्यानम
कर्पुरगौरं करुणावतारं संसारसारं भुजगेन्द्रहारम |
सदा वसन्तं हृदयारविन्दे भवं भवानीसहितं नमामि ||

श्री शिव कवचम

ॐ नमो भगवते सदाशिवाय, सकलतत्वात्मकाय, सर्वमंत्रस्वरूपाय, सर्वमंत्राधिष्ठिताय, सर्वतंत्रस्वरूपाय, सर्वतत्वविदूराय, ब्रह्मरुद्रावतारिणे, नीलकंठाय, पार्वतीमनोहरप्रियाय, सोमसुर्याग्नीलोचनाय, भस्मोधूलितविग्रहाय, महामणिमुकुटधारणाय, माणिक्यभूषणाय, सृष्टिस्थितिप्रलयकालरौद्रावताराय, दक्षाध्वरध्वन्सकाय, महाकालभेदनाय, मुलाधारैकनिलयाय, तत्वातीताय, गंगाधराय, सर्वदेवाधिदेवाय, षडाश्रयाय, वेदांतसाराय, त्रिवर्गसाधनाया नेक्कोटीब्रहमांडनायकायानन्त्वासुकीतक्षककर्कोटकशंखकुलिकपद्ममहापद्मेत्यष्टनागकुलभूषणाय, प्रणवरूपाय, चिदाकाशायाकाशदिकस्वरूपाय, ग्रहनक्षत्रमालिने, सकलायकलंकरहिताय, सकललोकैककर्त्रे, सकललोकैकसंहर्त्रे, सकललोकैकगुरवे, सकललोकैकभर्त्रे, सकललोकैकसाक्षीणे, सकलनिगमगुह्याय, सकलवेदांतपारगाय, सकललोकैकवरप्रदाय, सकललोकैकशंकराय, शशांकशेखराय, शाश्वतनिजावासाय, निराभासाय, निरामयाय, निर्मलाय, निर्लोभाय, निर्मोहाय, निर्मदाय, निश्चिन्ताय, निर्हंकाराय, निराकुलाय, निष्कलन्काय, निर्गुणाय, निष्कामाय, निरुप्लवाय, नीवद्याय, निरन्तराय, निष्कारणाय, निरातंकाय, निष्प्रपंचाय, नि:संगाय, निर्द्वंदाय, निराधाराय, नीरोगाय, निष्क्रोधाय, निर्गमाय, निष्पापाय, निर्भयाय, निर्विकल्पाय, निर्भेदाय, निष्क्रियाय, निस्तुल्याय, निस्संशयाय, निरंजनाय, निरुपम विभवाय, नित्यशुद्धबुद्धपरिपूर्णसच्चिदानंदाद्वयाय, परमशांतस्वरूपाय, तेजोरूपाय, तेजोमयाय,
जयजय रूद्रमहारौद्र, भद्रावतार, महाभैरव, कालभैरव, कल्पान्तभैरव, कपाल मालाधर, खट्वांगखंगचर्मपाशांकुशडमरूकरत्रिशूल चापबाणगदाशक्तिभिन्दिपालतोमरमुसलमुदगरप्रासपरिघभुशुण्डीशतघ्नीचक्रद्यायुद्धभीषणकर, सहस्रमुख, दंष्ट्रा कराल वदन, विक्टाट हास विस्फारित ब्रहमांड मंडल, नागेन्द्र कुंडल, नागेन्द्रहार, नागेन्द्र वलय, नागेन्द्र चर्मधर, मृत्युंजय, त्रयम्बक, त्रिपुरान्तक, विश्वरूप, विरूपाक्ष, विश्वेश्वर, वृषवाहन, विश्वतोमुख सर्वतो रक्ष रक्ष माम |
ज्वल ज्वल महामृत्युअपमृत्युभयं नाशय नाशय चौर भयंमुत्सारयोत्सारय: विष सर्प भयं शमय शमय: चौरान मारय मारय: मम शत्रून उच्चाटयोच्चाटय: त्रिशुलेंन विदारय विदारय: कुठारेण भिन्धि भिन्धि: खंगेन छिन्धि छिन्धि: खट्वांगेन विपोथय विपोथय: मूसलेन निष्पेषय निष्पेषय: बाणे: संताडय संताडय: रक्षांसि भीषय भीषयाशेष्भूतानी विद्रावय विद्रावय: कुष्मांडवेतालमारीचब्रहमराक्षसगणान संत्रासय संत्रासय: माम अभयं कुरु कुरु: वित्रस्तं माम अश्वास्याश्वसय: नरक भयान माम उद्धरौद्धर: संजीवय संजीवय: क्षुत्रिडभ्यां माम आप्यापय आप्यापय: दु:खातुरं माम आनंदय आनंदय : शिव कवचे न माम आच्छादय आच्छादय: मृत्युंजय! त्रयम्बक! सदाशिव!!! नमस्ते नमस्ते ||


विशेष सूचना:- हमने अपने बहुत से भक्तो की अनेक भयानक से भयानक विपत्तियों का निराकरण इस शिव कवच के अनुष्ठान से कर दिया है | सी बी आई के केसों में फसे हुओ को भी हमने इस शिव कवच और माँ बगलामुखी के अनुष्ठान से सकुशल बचाया और उन केसों में विजय प्राप्ति करवाई है ||

रविवार, 27 जून 2010

मंगल चंडिका प्रयोग

प्रथम :- मंत्र और स्त्रोत्र प्रयोग
यह प्रयोग मंगली लोगो को मंगल की वजह से उनके विवाह, काम-धंधे में आ रही रूकावटो को दूर कर देता है
मंत्र:- ॐ ह्रीं श्रीं कलीम सर्व पुज्ये देवी मंगल चण्डिके ऐं क्रू फट् स्वाहा
( देवी भगवत के अनुसार अन्य मंत्र :- ॐ ह्रीं श्रीं कलीम सर्व पुज्ये देवी मंगल चण्डिके हूँ हूँ फट् स्वाहा )
दोनों में से कोई भी मन्त्र जप सकते है
ध्यान :-
देवी षोडश वर्षीया शास्वत्सुस्थिर योवनाम| सर्वरूप गुणाढ्यं च कोमलांगी मनोहराम|
स्वेत चम्पक वऱॅणाभाम चन्द्र कोटि सम्प्रभाम| वन्हिशुद्धाशुका धानां रत्न भूषण भूषिताम|
बिभ्रतीं कवरीभारं मल्लिका माल्य भूषितं| बिम्बोष्ठिं सुदतीं शुद्धां शरत पद्म निभाननाम|
ईशदहास्य प्रसन्नास्यां सुनिलोत्पल लोचनाम| जगद धात्रीं च दात्रीं च सर्वेभ्य सम्पत्प्रदाम|
संसार सागरेघोरे पोत रूपां वरां भजे|
स्त्रोत्र:-
||शंकर उवाच||
रक्ष रक्ष जगन मातर देवी मंगल चण्डिके | हारिके विपदां राशे: हर्ष मंगल कारिके ||
हर्ष मंगल दक्षे च हर्ष मंगल चण्डिके | शुभ मंगल दक्षे च शुभ मंगल चण्डिके ||
मंगले मंगलार्हे च सर्व मंगल मंगले | सतां मंगलदे देवी सर्वेषां मंग्लालये ||
पूज्या मंगलवारे च मंगलाभीष्ट दैवते | पूज्य मंगल भूपस्य मनुवंशस्य संततम ||
मंगलाधिष्ठात्रिदेवी मंगलानां च मंगले | संसार मंगलाधारे मोक्ष मंगलदायिनी ||
सारे च मंगलाधारे पारे च सर्वकर्मणाम | प्रति मंगलवारे च पूज्य च मंगलप्रदे ||
स्त्रोत्रेणानेन शम्भुश्च स्तुत्वा मंगल चंडीकाम | प्रति मंगलवारे च पूजां कृत्वा गत: शिव: ||
देव्याश्च मंगल स्त्रोत्रम यं श्रुणोति समाहित: | तन्मंगलं भवेत्श्चान्न भवेत् तद मंगलं ||

विधि विधान :-
मंगलवार को संध्या समय पर स्नान करके पवित्र होकर एक पंचमुखी दीपक जलाकर माँ मंगल चंडिका की पूजा श्रधा भक्ति पूर्वक करे/ माँ को एक नारियल और खीर का भोग लगाये | उपरोक्त दोनों में से किसी एक मंत्र का मन ही मन १०८ बार जप करे तथा स्त्रोत्र का ११ बार उच्च स्वर से श्रद्धा पूर्वक प्रेम सहित पाठ करे | ऐसा आठ मंगलवार को करे | आठवे मंगलवार को किसी भी सुहागिन स्त्री को लाल ब्लाउज, लाल रिब्बन, लाल चूड़ी, कुमकुम, लाल सिंदूर, पान-सुपारी, हल्दी, स्वादिष्ट फल, फूल आदि देकर संतुष्ट करे | अगर कुंवारी कन्या या पुरुष इस प्रयोग को कर रहे है तो वो अंजुली भर कर चने भी सुहागिन स्त्री को दे , ऐसा करने से उनका मंगल दोष शांत हो जायेगा | इस प्रयोग में व्रत रहने की आवश्यकता नहीं है अगर आप शाम को न कर सके तो सुबह कर सकते है |
यह अनुभूत प्रयोग है और आठ सप्ताह में ही चमत्कारिक रूप से शादी-विवाह की समस्या, धन की समस्या, व्यापार की समस्या, गृह-कलेश, विद्या प्राप्ति आदि में चमत्कारिक रूप से लाभ होता है