रविवार, 5 जून 2011

सभी देशवासियों से एक अपील

सभी देशवासियों से एक अपील:-

दिल्ली के रामलीला मैदान में आधी रात को जो जुल्म पुलिस ने शासन के आदेश से सोये हुए लोगो पर ढाए है वो कतई सहन करने लायक नहीं है| इस घटना की जितनी निंदा की जाये उतनी कम है| 
ये सरकार लोगो को  बाबा रामदेव के समर्थन में भ्रष्टाचार के खिलाफ शांति पूर्ण विरोध प्रदर्शन भी नहीं करने दे रही है | मैंने तो ये पुस्तकों में ही पढ़ा था की गाँधी जी के शांतिपूर्ण आन्दोलनों को अंग्रेज सरकार बड़ी बर्बरता से कुचलती  थी | ऐसा ही कुछ आज टी वी चैनलो में देखने को मिला वो इस सरकार की सच्चाई कुछ इस तरह बयां कर रहे है की ये सरकार भ्रष्टाचारियो के समर्थन में खडी दीख रही है  और भ्रष्टाचार विरोधियों का दमन करा रही है
मेरा केवल यही निवेदन है की हम सब भ्रष्टाचार के खिलाफ इकट्ठे खड़े हो और आने वाले चुनाव में जो दल काले धन को विदेशो से वापस  लाने और भ्रष्टाचार को रोकने के लिए जन जाग्रति और सख्त कानून बनाने पर सहमत हो उसे सहयोग करे | हम सब भ्रष्टाचार विरोधी मुहीम में बाबा रामदेव और अन्ना  हजारे जी के साथ हो | (वर्तमान सरकार भ्रष्टाचारियो का संगठन है इसीलिए ये भ्रष्टाचर विरोध का  दमन कर रही है | इसके कार्यकाल में भ्रष्टाचार चरम पर है )

गुरुवार, 10 मार्च 2011

मनोकामना पूरक श्री बगलामुखी मंत्र

 मनोकामना पूरक श्री बगलामुखी मंत्र

ॐ ह्ल्रीम बगलामुखी जगत वशं करी माँ पिताम्बरे प्रसीद-प्रसीद मम सर्व मनोरथान पूरय- पूरय हल्रीम ॐ  

रविवार, 24 अक्तूबर 2010

शत्रु-विध्वंसिनी-स्तोत्र






शत्रु-विध्वंसिनी-स्तोत्र

विनियोगः- ॐ अस्य श्रीशत्रु-विध्वंसिनी-स्तोत्र-मन्त्रस्य ज्वाला-व्याप्तः ऋषिः, अनुष्टुप छन्दः, श्रीशत्रु-विध्वंसिनी देवता, श्रीशत्रु-जयार्थे (उच्चाटनार्थे नाशार्थे वा) जपे विनियोगः।

ऋष्यादि-न्यासः- शिरसि ज्वाला-व्याप्त-ऋषये नमः। मुखे अनुष्टुप छन्दसे नमः, हृदि श्रीशत्रु-विध्वंसिनी देवतायै नमः, अञ्जलौ श्रीशत्रु-जयार्थे (उच्चाटनार्थे नाशार्थे वा) जपे विनियोगाय नमः।।

कर-न्यासः- ॐ श्रीशत्रु-विध्वंसिनी अंगुष्ठाभ्यां नमः। ॐ त्रिशिरा तर्जनीभ्यां नमः। ॐ अग्नि-ज्वाला मध्यमाभ्यां नमः। ॐ घोर-दंष्ट्री अनामिकाभ्यां नमः। ॐ दिगम्बरी कनिष्ठिकाभ्यां नमः। ॐ रक्त-पाणि करतल-करपृष्ठाभ्यां नमः।

हृदयादि-न्यासः- ॐ रौद्री हृदयाय नमः। ॐ रक्त-लोचनी शिरसे स्वाहा। ॐ रौद्र-मुखी शिखायै वषट्। ॐ त्रि-शूलिनो कवचाय हुम्। ॐ मुक्त-केशी नेत्र-त्रयाय वौषट्। ॐ महोदरी अस्त्राय फट्।

फट् से ताल-त्रय दें (तीन बार ताली बजाएँ) और “ॐ रौद्र-मुख्यै नमः” से दशों दिशाओं में चुटकी बजाकर दिग्-बन्धन करें।

स्तोत्रः-
“ॐ शत्रु-विध्वंसिनी रौद्री, त्रिशिरा रक्त-लोचनी।
अग्नि-ज्वाला रौद्र-मुखी, घोर-दंष्ट्री त्रि-शूलिनी।।१
दिगम्बरी मुक्त-केशी, रक्त-पाणी महोदरी।”

फल-श्रुतिः- एतैर्नाममभिर्घोरैश्च, शीघ्रमुच्चाटयेद्वशी,
इदं स्तोत्रं पठेनित्यं, विजयः शत्रु-नाशनम्।
सगस्त्र-त्रितयं कुर्यात्, कार्य-सिद्धिर्न संशयः।।

विशेषः-

यह स्तोत्र अत्यन्त उग्र है। इसके विषय में निम्नलिखित तथ्यों पर ध्यान अवश्य देना चाहिए-
(क) स्तोत्र में ‘ध्यान’ नहीं दिया गया है, अतः ‘ध्यान’ स्तोत्र के बारह नामों के अनुरुप किया जायेगा। सारे नामों का मनन करने से ‘ध्यान’ स्पष्ट हो जाता है।
(ख) प्रथम और अन्तिम आवृति में नामों के साथ फल-श्रुति मात्र पढ़ें। पाठ नहीं होगा।
(ग) घर में पाठ कदापि न किया जाए, केवल शिवालय, नदी-तट, एकान्त, निर्जन-वन, श्मशान अथवा किसी मन्दिर के एकान्त में ही करें।
(घ) पुरश्चरण की आवश्यकता नहीं है। सीधे ‘प्रयोग’ करें। प्रत्येक ‘प्रयोग’ में तीन हजार आवृत्तियाँ करनी होगी।