गुरुवार, 19 अगस्त 2010

सुखी और समृद्ध जीवन के लिए बिना तोड़-फोड़ का वास्तु

आदमी के जीवन की रोटी कपडा और घर मुख्य जरुरत है आज के इस महंगाई के युग में सामर्थ्यवान लोग भी समयाभाव और अज्ञानतावश वास्तु सम्मत भवन नहीं बना पाते | अगर एक बार भवन किसी तरह बना लिया तो उसे तुडवा कर दुबारा बनवा पाना संभव नहीं हो पाता | फिर बन चुके भवन में ही वास्तु दोष को किस तरह दूर किया जाय | आज मै आपको कुछ ऐसे उपाय बताऊंगा जिससे की भवन में बिना कुछ तोड़-फोड़ किया वास्तु दोष को दूर किया जा सके और जीवन को सुखी और समृद्ध बनाया जा सके |

१ घर का ईशान (पूर्व और उत्तर के मध्य का कोण ) हमेशा स्वच्छ और खाली रखना चाहिए | ध्यान रहे यहाँ शौचालय किसी भी हालत में नहीं हो |
२ घर में अग्नि का स्थान वास्तु सम्मत दिशा - अग्नि कोण ( दक्षिण और पूर्व के मध्य का कोण ) में होना चाहिए | अग्नि कोण ही अग्नि का स्थान है | अतः रसोईघर यथा संभव दक्षिण-पूर्व दिशा में ही बनाना चाहिए | मुख्य द्वार या खिड़की से चूल्हा दिखाई नहीं देना चाहिए अन्यथा परिवार पर संकट आने की सम्भावना रहती है | पानी का बर्तन रसोई के उत्तर-पूर्व या पूर्व में भरकर रखें |
३ घर में पानी सही स्थान पर और सही दिशा में रखने से परिवार के सदस्यों का स्वास्थ्य अनुकूल रहता है | और सुख समृधि में वृद्धि होती है | पानी का स्थान ईशान कोण (पूर्व और उत्तर के मध्य का कोण ) है अतः पानी का भण्डारण अथवा भूमिगत टंक या बोरिंग पूर्व, उत्तर या पूर्वोत्तर दिशा में होनी चाहिए | पानी को ऊपर की टंकी में भेजने वाला पम्प भी इसी दिशा में होना चाहिए | दक्षिण- पूर्व (अग्नि कोण) , उत्तर-पश्चिम ( वायव्य कोण), दक्षिण-पश्चिम (नैरित्य कोण) कोण में कुंवा अथवा ट्यूबेल नहीं होना चाहिए | इसके लिए उत्तर पूर्व कोण (ईशान कोण) उपयुक्त स्थान है | इससे वास्तु का संतुलन बना रहता है | अन्य दिशा में कुंवा या ट्यूबवेल हो तो उसे भरवा दें | यदि भरवाना संभव न हो तो उसका उपयोग न करें |
४ नहाने का कमरा पूर्व दिशा में शुभ होता है | ध्यान रखे की घर के किसी नल से पानी नहीं रिसना चाहिए अन्यथा भुखमरी की स्थिति पैदा हो सकती है |
५ ओवर हेड टैंक मकान के उत्तर और वायव्य कोण के बीच होना चाहिए | टैंक का उपरी भाग गोल होना चाहिए |
६ मकान बनाते समय हवा और धूप का विशेष ध्यान रखना चाहिए | निर्माण इस तरह होना चाहिए की हवा और धूप सर्दी और गर्मी में आवश्यकता के अनुरूप प्राप्त होती रहें |
७ सोने के कमरे में, खासकर विवाहित जोड़े के कमरे में पूजाघर कदापि न बनायें | यदि स्थानाभाव के कारन ऐसा करना ही पड़े तो पूजास्थल को हर तरफ से परदे में रखे | पूजास्थान सदा साफ सुथरा रखना चाहिए | इसे उत्तर-पूर्व (ईशान कोण ) में होना चाहिए | पूजा घर में कीमती वस्तुएं, धन आदि छिपाकर न रखे |
८ सोते समय सिरहाना दक्षिण-पश्चिम कोण (नैर्रित्य कोण) में दक्षिण की तरफ होना चाहिए | इस प्रकार सोने से नींद गहरी और अच्छी आती है |
९ यदि दक्षिण-पश्चिम दिशा में अधिक द्वार और खिड़कियाँ हो तो उन्हें बंद करके उनकी संख्या कम कर देनी चाहिए |
१० मुख्य द्वार या खिड़की के सामने सैटेलाइट या डिश एंटीना का होना प्राणिक उर्जा को नष्ट करता है | अतः ये चीजे इन स्थान पर न लगायें |
११ भवन में खिडकिया अधिक हो तो, गृहस्वामी का स्वभाव चिडचिडा होता है | इसलिए कुछ खिडकिया हमेशा बंद रखे और सभी खिडकियों पर परदे लगायें |
१२ मुख्य द्वार बाधा रहित होना चाहिए अर्थात उसके सामने बिजली के खम्भे, ट्रांसफार्मर जैसा कोई अवरोध नहीं होना चाहिए |
१३ यदि मकान दक्षिणमुखी हो तो, घर के मुख्य द्वार पर चांदी की थोड़ी पट्टी लगायें, लाभ होगा|
१४ पूर्व-उत्तर दिशा का भाग यदि ऊँचा हो तो, दक्षिण-पश्चिम भाग में कोई निर्माण कार्य करा लें, ताकि उत्तर पूर्व दिशा का भाग निचा हो जाये |
१५ घर की छत पर चारो कोनो में तुलसी के गमले रखें, इससे मकान पर बिजली गिरने के सम्भावना कम हो जाती है |
१६ पश्चिम दिशा में बैठकर भोजन करने से संतोष, सुख व शांति मिलती है | अतः भोजन कक्ष पश्चिम में होना चाहिए | यदि यह संभव न हो तो डाइनिंग टेबल पश्चिम में लगायें |
१७ अपनी दुकान या दफ्तर में उत्तर-पूर्व में कुछ स्थान खाली रखें | दफ्तर या दुकान में पश्चिम व दक्षिण दिशा में अधिक सामान जैसे फर्नीचर, अलमारी, रिकार्ड आदि न रखें | स्वयं उत्तर पूर्व की और मुहं करके बैठें |
१८ अक्सर देखने में आता है की कार्यालय या घर में कुछ न कुछ अनावश्यक अथवा कम उपयोगी सामान पड़े होते है | इन्हें इधर-उधर फेंकना या रखना न केवल भद्दा लगता है बल्कि हानिप्रद भी होता है | भारी या अनावश्यक सामान को दक्षिण दिशा या नैर्रित्य कोण में रखे | यहाँ किसी देवी-देवता का चित्र न लगाये | इसे पानी व सीलन से भी बचाएं | अर्थात स्टोर रूम को भी साफ व व्यवस्थित रखें |
१९ यदि भवन का दक्षिण-पश्चिम भाग नीचा हो तो दक्षिण-पश्चिम कोण में काफी ऊँचा टी वी का एंटीना लगायें, तत्संबंधी वास्तु दोष दूर हो जायेगा |
२० इस बात का खास ध्यान रखना चाहिए कि अलमारिया खिड़की के बाहर से दिखाई न दे | चेक बुक, बैंक और व्यापार के कागजात, नगद, आभूषण आदि अलमारी कि तिजोरी में इस प्रकार रखे की वह दक्षिण या नैर्रित्य की और न खुले, अन्यथा धन की हानी होगी | तिजोरी शयन कक्ष में नहीं रखे | यदि रखनी ही हो तो दक्षिण भाग में इस तरह रखे कि उसका मुह उत्तर अर्थात कुबेर कि दिशा कि ओर खुले |
२१ घर में नौ दिन तक भगवान् के अखंड कीर्तन कराएँ, दोष से मुक्ति मिलेगी | मुख्य द्वार पर सिंदूर या कुमकुम से नौ अंगुल लम्बा और नौ अंगुल चौड़ा स्वस्तिक का चिन्ह बनाये, वास्तु दोष से मुक्ति मिलेगी | इसके अतिरिक्त यह चिन्ह घर के वास्तु दोष से ग्रस्त सभी स्थलों पर बनायें |
२२ रामायण ,महाभारत या युद्ध दर्शाते चित्र, राक्षस, चुड़ैल, या बिलखते बच्चो का चित्र, विभीषिका दर्शाता कोई चित्र या मूर्ति घर में न लगायें | अगर कोई पहले से लगा हो तो उसे हटा दे | अर्जुन को गीता का ज्ञान देते श्रीकृष्ण का चित्र भी न लगायें | अन्यथा वैमनस्यता हो सकती है | बच्चो के कमरे में सफल व्यक्तियों और महापुरुषों के चित्र लगायें |
२३ परिवार के स्वर्गवासी व्यक्तियों के चित्र दक्षिण-पश्चिम में लगाने चाहियें |
२४ घर में गिद्ध, उल्लू, सियार, कौए, सूअर, सांप, बाज, आदि के चित्र कदापि न लगायें |
२५ घर के पीछे खाली जगह या बगीचा हो और कोई पहाड़, भवन या आबादी नहीं हो तो यह शुभ नहीं है | वास्तु कि दृष्टि से ऐसा भवन असुरक्षित रहता है |
२६ घर कि उत्तर और पूर्व दिशाओ में खिड़कियाँ, द्वार, जाल और बरामदा आदि बनवाएं और खुली जगह रखें | ध्यान रखें घर का कोई भाग गोलाकार न हो |
२७ ध्यान रखे पडोसी कि वाशिंग मशीन, सुखाते कपडे आदि आपके घर कि खिड़की से दिखाई न दें |
२८ घर में चंपा, मनीप्लांट, चन्दन, तुलसी, अनार आदि के पौधे लगायें वास्तु दोष दूर होंगे | ईशान कोण में पीले रंग के फूल लगाने चाहिए | तुलसी का पौधा वास्तु दोष निवारण के लिए सर्वोत्तम होता है | यह पौधा रामनवमी के दिन आंगन में चबूतरा बनाकर लगाना चाहिए |
२९ अध्ययन कक्ष के ईशान कोण में बच्चो के लिए पीने का पानी रखे | यहाँ अपने इष्टदेव की तस्वीर लगायें | अध्ययन कक्ष की दीवार पर बड़े दर्पण न लगायें | अधिक तस्वीरें भी न लगायें, पर भगवान गणेश माँ सरस्वती की तस्वीरें अवश्य लगायें |
३० यदि घर की किसी कन्या का विवाह नहीं हो पा रहा हो या उसमे विघ्न-बाधा आ रही हो तो उसे घर के वायव्य कोण वाले कमरे में सुलाएं | मेहमान घर से जाने का नाम न ले रहे हो तो उन्हें वायव्य कोण वाले कमरे में ठहराएँ |
३१ कर्ज ज्यादा हो तो भूमि का ढलान ईशान कोण की और कर दें | यदि ढलान पहले से ही हो तो नैऋत्य कोण को थोडा ऊँचा कर दें, कर्ज की समस्या सुलझ जाएगी |
३२ घर का ईशान कोण दूषित हो तो परिवार में अनेक समस्याएं आती है | इस दोष से मुक्ति हेतु एक घड़ा बरसात के पानी से भरकर उसे मिटटी के बर्तन से ढककर ईशान कोण में दबा दें |
३३ द्वार खोलते ही सीढियों का दिखाई देना अशुभ होता है | यदि आपके घर की सीढियाँ इस स्थिति में है तो उनके मध्य में एक पर्दा लगा दें |
३४ यदि शयनकक्ष या पलंग में कांच लगवाया हो तो रात को सोते समय उस पर पर्दा डालें | पलंग को दीवार से सटाकर न रखे | सोते समय सर दक्षिण की ओर रखे | सोते समय पैर प्रवेश द्वार की ओर न रखे |
३५ दीवारों का रंग गहरा हो तो गृहस्वामी और परिवार के अन्य सदस्यों का स्वभाव उग्र होता है | और क्रोध पर उनका नियंत्रण नहीं होता | अतः अपने घर की दीवारों का रंग अपनी राशि के अनुकूल किन्तु हल्का रखें |
३६ यदि घर के आग्नेय कोण में वास्तु दोष हो तो वहा अग्नि का सामान रखे और साथ ही वहां एक लाल रंग का बल्ब हर पल जलाये रखे |
३७ घर के पश्चिमी भाग में दोष होने पर उस भाग में शनि यन्त्र की प्राण-प्रतिष्ठा कराकर स्थापना करें | साथ ही द्वार पर काले घोड़े की नाल लगायें |
३८ भूखंड वही ख़रीदे जिसका ढलान पूर्व, उत्तर अथवा ईशान में हो |
३९ घर में बिजली के सामान टीवी, फ्रिज, म्यूजिक सिस्टम, घड़ियाँ आदि चालू अवस्था में होना चाहिए | इनका बंद होना परिवार की उन्नति में बाधक होता है |
४० यदि आपका स्वास्थ्य ठीक नहीं रहता या आप स्वयं को फुर्तीला महसूस नहीं करते, तो भोजन करते समय प्लेट या थाली दक्षिण-पूर्व दिशा (आग्नेय कोण) की ओर रखे और सूर्य की तरफ मुह करके भोजन करें |
४१ टेलीफोन सदा दक्षिण-पूर्व में रखे | इस दिशा में टेलीफोन रखने से यह जल्दी ख़राब नहीं होता |
४२ धन सम्बन्धी कागजात जैसे चेक बुक, पास बुक, एटीम कार्ड, आदि घर के उत्तरी भाग में रखे | इसके साथ श्री यन्त्र या कुबेर यन्त्र भी रखे धन वृद्धि के स्रोत्र बनेंगे |
४३ घर के मुख्य द्वार के सामने देवी देवताओ के मंदिर नहीं होने चाहिए, न ही घर के पीछे मंदिर की छाया पड़नी चाहिए | मुख्य द्वार की चौड़ाई ऊंचाई की आधी होनी चाहिए |
४४ घर का मुख्य द्वार और पिछला द्वार एक सीध में कदापि नहीं होने चाहिए | मुख्य द्वार सदा साफ सुथरा रखे |
४५ पीपल, बड या बहेड़े की लकड़ी का फर्नीचर घर में न रखे क्योंकि ये पेड़ प्रेत बाधा और अशांति के करक होते है|

पति पत्नी के सुखी जीवन के लिये वास्तु की उपयोगिता
आज के भौतिक संसार में मनुष्य अध्यात्म को छोड़कर भौतिक सुखों के पीछे भाग रहा है। समय के अभाव ने उसे रिश्तों के प्रति उदासीन बना दिया है। किंतु आज भी मनुष्य अपने घर में संसार के सारे सुखों को भोगना चाहता है। इसके लिए हमें वैवाहिक जीवन को वास्तु से जोड़ना होगा। वास्तव में हम ऐसा क्या करें कि पति-पत्नी के बीच अहंकार की जगह प्रेम, प्रतियोगिता के स्थान पर सानिध्य मिले।

यद्यपि गृहस्थ जीवन में या व्याहारिक जीवन में कोई भी छोटा सा कारण एक बड़े कारण में परिवर्तित हो जाता है। चाहे वह आर्थिक हो या घर के अन्य सदस्यों को लेकर हो। इसका सीधा प्रभाव पति-पत्नी के आपसी संबंधों पर पड़ता है। इसलिए घर का वातावरण ऐसा होना चाहिए कि ऋणात्मक शक्तियां कम तथा सकारात्मक शक्तियां अधिक क्रियाशील हों। यह सब वास्तु के द्वारा ही संभव हो सकता है।

घर के ईशान कोण का बहुत ही महत्व है। यदि पति-पत्नी साथ बैठकर पूजा करें तो उनका आपस का अहंकार खत्म होकर संबंधों में मधुरता बढ़ेगी। गृहलक्ष्मी द्वारा संध्या के समय तुलसी में दीपक जलाने से नकारात्मक शक्तियों को कम किया जा सकता है। घर के हर कमरे के ईशान कोण को साफ रखें, विशेषकर शयनकक्ष के।

पति-पत्नी में आपस में वैमनस्यता का एक कारण सही दिशा में शयनकक्ष का न होना भी है। अगर दक्षिण-पश्चिम दिशाओं में स्थित कोने में बने कमरों में आपकी आवास व्यवस्था नहीं है तो प्रेम संबंध अच्छे के बजाए, कटुता भरे हो जाते हैं।

शयनकक्ष के लिए दक्षिण दिशा निर्धारित करने का कारण यह है कि इस दिशा का स्वामी यम, शक्ति एवं विश्रामदायक है। घर में आराम से सोने के लिए दक्षिण एवं नैऋत्य कोण उपयुक्त है। शयनकक्ष में पति-पत्नी का सामान्य फोटो होने के बजाए हंसता हुआ हो, तो वास्तु के अनुसार उचित रहता है।

घर के अंदर उत्तर-पूर्व दिशाओं के कोने के कक्ष में अगर शौचालय है तो पति-पत्नी का जीवन बड़ा अशांत रहता है। आर्थिक संकट व संतान सुख में कमी आती है। इसलिए शौचालय हटा देना ही उचित है। अगर हटाना संभव न हो तो शीशे के एक बर्तन में समुद्री नमक रखें। यह अगर सील जाए तो बदल दें। अगर यह संभव न हो तो मिट्टी के एक बर्तन में सेंधा नमक डालकर रखें।

घर के अंदर यदि रसोई सही दिशा में नहीं है तो ऐसी अवस्था में पति-पत्नी के विचार कभी नहीं मिलेंगे। रिश्तों में कड़वाहट दिनों-दिन बढ़ेगी। कारण अग्नि का कहीं ओर जलना। रसोई घर की सही दिशा है आग्नेय कोण। अगर आग्नेय दिशा में संभव नहीं है तो अन्य वैकल्पिक दिशाएं हैं। आग्नेय एवं दक्षिण के बीच, आग्नेय एवं पूर्व के बीच, वायव्य एवं उत्तर के बीच।

अत: यदि हम अपने वैवाहिक जीवन को सुखद एवं समृद्ध बनाना चाहते हैं और अपेक्षा करते हैं कि जीवन के सुंदर स्वप्न को साकार कर सकें। इसके लिए पूर्ण निष्ठा एवं श्रद्धा से वास्तु के उपायों को अपनाकर अपने जीवन में खुशहाली लाएं।

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