कैंसर की इस से अच्छी और कारगर दवा कोई नहीं है:
4 बार उबला हुआ और हर बार उबालने से पहले मलाई उतरा हुआ दूध, या फिर फिर कम वसा वाला देसी
गाय का दूध वो भी मलाई उतरा हुआ। ऐसा 300 ग्राम दूध अगले दिन सुबह सुबह उबाल कर उसमे नीम्बू
निचोड़ कर फाड़ लें। फिर उस दूध को छलनी में छानकर पानी फेक दें। उस पनीर को अच्छी तरह धोकर
हाथ से कुचलते हुए धोकर किसी महीन कपडे या जाली में दबाकर निचोड़कर उसका सारा पानी निकाल दें।
फिर वो पनीर किसी कटोरी में डालें, ऊपर से अलसी का 20-30 ग्राम तेल डालकर, पनीर में मिलाकर
सुबह खाली पेट खाएं। यही कैंसर का उपचार है. गोमूत्र का मालूम नहीं, लेकिन ये अलसी तेल वाला उपचार
स्वानुभूत है। ध्यान देने योग्य बात: पनीर में वसा और पानी नहीं होना चाहिए, या बोहोत ही कम होना
चाहिए। घर का बना पनीर ही इस्तेमाल करना है। इस दवा को बनाने में जो भी बर्तन अथवा जाली प्रयोग
होंगी, वो किसी भी साबुन या केमिकल से ना धोई जाएँ। जर्सी गाय का दूध इस्तेमाल नहीं करना है, देसी
गाय का सर्वोत्तम है, अन्यथा भैंस का दूध प्रयोग कर सकते हैं। इस दवा को खाने के बाद पानी या तरल का
सेवन नहीं करना है, सीधे भोजन ही करना है, वो भी कम से कम 45 मिनट बाद ही। अलसी तेल बाज़ार
का बोतल बंद नहीं लेना है, किसी भी कच्ची घानी से खुद निकलवा कर लायें, वो भी मशीन साफ़ करवाकर
अन्यथा उसमे अन्य पुराने तेलों की गंध आएगी। अलसी तेल में उपचारात्मक गुण तेल निकाले जाने के
25-30 दिन बाद ख़त्म होने लगते हैं, इसलिए तेल ताज़ा ही उचित रहेगा। कच्ची घानी किसी गाँधी आश्रम
में मिलने की संभावना हैं, वरना अब तो मशीन ही प्रयोग की जा रही हैं। दवा के सेवनकाल में रिफाइंड तेल,
रिफाइंड नमक और रिफाइंड चीनी का प्रयोग वर्जित है, मांसाहार तो बिलकुल नहीं करना है. चाय, कोफी
और कोई भी मद्य पदार्थ का सेवन करें ही नहीं अथवा बोहोत कम ही करें। बस, इतना ही है, लाभ उठाएं।
ये विश्वविख्यात दवाई है, पता नहीं हमारे ही देश में क्यों इसकी जानकारी नहीं है लोगों को।
4 बार उबला हुआ और हर बार उबालने से पहले मलाई उतरा हुआ दूध, या फिर फिर कम वसा वाला देसी
गाय का दूध वो भी मलाई उतरा हुआ। ऐसा 300 ग्राम दूध अगले दिन सुबह सुबह उबाल कर उसमे नीम्बू
निचोड़ कर फाड़ लें। फिर उस दूध को छलनी में छानकर पानी फेक दें। उस पनीर को अच्छी तरह धोकर
हाथ से कुचलते हुए धोकर किसी महीन कपडे या जाली में दबाकर निचोड़कर उसका सारा पानी निकाल दें।
फिर वो पनीर किसी कटोरी में डालें, ऊपर से अलसी का 20-30 ग्राम तेल डालकर, पनीर में मिलाकर
सुबह खाली पेट खाएं। यही कैंसर का उपचार है. गोमूत्र का मालूम नहीं, लेकिन ये अलसी तेल वाला उपचार
स्वानुभूत है। ध्यान देने योग्य बात: पनीर में वसा और पानी नहीं होना चाहिए, या बोहोत ही कम होना
चाहिए। घर का बना पनीर ही इस्तेमाल करना है। इस दवा को बनाने में जो भी बर्तन अथवा जाली प्रयोग
होंगी, वो किसी भी साबुन या केमिकल से ना धोई जाएँ। जर्सी गाय का दूध इस्तेमाल नहीं करना है, देसी
गाय का सर्वोत्तम है, अन्यथा भैंस का दूध प्रयोग कर सकते हैं। इस दवा को खाने के बाद पानी या तरल का
सेवन नहीं करना है, सीधे भोजन ही करना है, वो भी कम से कम 45 मिनट बाद ही। अलसी तेल बाज़ार
का बोतल बंद नहीं लेना है, किसी भी कच्ची घानी से खुद निकलवा कर लायें, वो भी मशीन साफ़ करवाकर
अन्यथा उसमे अन्य पुराने तेलों की गंध आएगी। अलसी तेल में उपचारात्मक गुण तेल निकाले जाने के
25-30 दिन बाद ख़त्म होने लगते हैं, इसलिए तेल ताज़ा ही उचित रहेगा। कच्ची घानी किसी गाँधी आश्रम
में मिलने की संभावना हैं, वरना अब तो मशीन ही प्रयोग की जा रही हैं। दवा के सेवनकाल में रिफाइंड तेल,
रिफाइंड नमक और रिफाइंड चीनी का प्रयोग वर्जित है, मांसाहार तो बिलकुल नहीं करना है. चाय, कोफी
और कोई भी मद्य पदार्थ का सेवन करें ही नहीं अथवा बोहोत कम ही करें। बस, इतना ही है, लाभ उठाएं।
ये विश्वविख्यात दवाई है, पता नहीं हमारे ही देश में क्यों इसकी जानकारी नहीं है लोगों को।
