रविवार, 11 अगस्त 2013

अभिचार-कर्म नाशक :साबर साधना



आजकल छोटी-मोटी तंत्र का क्रिया लोग शत्रुत्व के हिसाब से कराते रहेते है,थोडासा भी क्या मनमुटाव हो गया तो समजो एक तो खुद करेगे या किसी तांत्रिक को पैसा देकर दूसरों को परेशान करने का काम करेगे,ये साधना करने के बाद न अब तांत्रिक सो पाएगा ना ही प्रयोग करने वाला छोटा डॉन चैन से सो पायेगा हा हा हा.................अब तो मजा आजायेगा..........क्यूकी इस प्रयोग से तंत्र बाधा जहा समाप्त होती है वही आप पर किए जाने वाले तंत्र-मंत्र इत्यादि वापस लौट जाते है,आप पर प्रयोग करने वाले की पुंगी बज जाती है..............हर लड़की ने तो यह प्रयोग करना ही चाहिए ताकि उन्हे पता चले उनपर किसिने वशीकरण तो नहीं किया है???समस्याये अनेक परंतु उपाय एक साबर मंत्र साधना.......

साधना तो बेहद आसान है,साधना काल मे ब्रम्हचैर्यत्व आवश्यक है,माला रुद्राक्ष का हो,धोती और आसन भगवे एवं लाल रंग का हो,दीपक मे सिर्फ देशी घी होना चाहिये,लोबान का धूप जलाओ,साधना से पूर्व गणेश जी ,गुरुजी और दत्त-महाप्रभुजी का पूजन आवश्यक है॰

निम्न मंत्र का जाप किसि भी शनिवार से करे,यह साधना 11 दिन का है,साधना शाम के समय करना अनुकूल है,साधना मे नित्य 108 बार मंत्र जाप आवश्यक है,मंत्र का जब भी स्वयं के लिए प्रयोग करना हो तो 7 बार मंत्र बोलकर जल पे 3 बार फुक मारे और जल को ग्रहण करले दूसरे व्यक्ति के लिये भि यही विधान है,अगर प्रयोग आपके सामने किया जा रहा हो तो तुरंत ही ७ बार मंत्र बोलकर अपने सिने पे ३ फुक मारले........तो तंत्र-मंत्र का असर नष्ट होता है और किया गया तंत्र-मंत्र करनेवाले पे वापस लौट जाता है......

मंत्र-

जल बाँधो,जलाजल बाँधो । जल के बाँधो कीरा,नौ नगर के राजा बाँधो,टोना के बाँधो जंजीरा । धरमदास कबीर, चकमक धुरी धर के काटे जाम के जूरी । काकर फूँके, मोर फूँके । मोर गुरु धरमदास के फूँके, जिहा से आय हस, वही चले जा, सत गुरु,सत कबीर

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