रविवार, 6 अक्तूबर 2013

2 अक्टूबर को जो सुनते है क्या यह सच है ?

अभी मै दूर दर्शन में देख रहा था राजघाट पोहुचे PM– सोनिया, अडवानी भी और कई नेता गण | और यह गीत सुनाया जा रहा था सावरमति के संत तूने करदिया कमाल, आज़ादी हमें दे गये बिना खड़ग बिना ढाल | इस से बड़ा झूट और क्या हो सकता है ? की बिना खड़ग बिना ढाल हमें आज़ादी मिल गयी ? भारत वासिओं को आज़ादी किनसे मिली? अंग्रेजों की गुलामी से ? अगर यह सच है तो 15 अगस्त 1947 के बाद भी माउन्ट बेटन इस भारत में क्या कर रहा था ? कौन था वह भारतीय थे क्या ?

तो आपने यह कैसा कह दिया की अंग्रेजों के हाथ से हमें आज़ादी मिली.और वह भी बिना खड़ग और बिना ढाल बताया जा रहा है | जब की 1857 से यह लड़ाई शुरू हुई, प्रथम शहीद होने वाले का नाम मंगल पाण्डेय, जिन्होंने अंग्रेजो द्वारा कारतूसों में ,गाय , और सुवर की चर्बी मिलाने का विरोध किया था | यह घटना है कोलकाता बैरकपुर छावनी की, 19 नंबर पलटनो को वह कारतूस दीगयी, तो हमारे देशभक्तों ने उस कारतूस को अपनाने से इंकार कर दिया | और अंग्रेजों ने बर्मा से गोरी पलटन मंग्वाली भारतीय सिपाहिओं को परेड में बुलवाकर बंदूकें रखवाली| भारतीय सिपाहिओं को सजा देना चाहती थी | जिसका विरोध मंगल पाण्डेय ने की थी और अंग्रेज अफसर ह्युसन, को ढेर कर दिया | फिर लेफ्टिनेंट बाघ को भी ढेर कर दिया, जब अंग्रेज अधिकारी भाग कर जनरल के बंगले पोहुचे, जनरल निकल कर आया सेनाओं को साथ लिए तो पाण्डेय ने अपनी छाती पर गोली मारली, जख्मी हो गये, और उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया | और 8 अप्रैल 1857 को उन्हें फासी दे दी गयी | फिर 19 और 34 नंबर पलटनो की नौकरी से निकल दी गयी | इसलिए देशके साथ वह लोग गद्दारी कर रहे हैं, जो झूठ बोलकर हमारे देश के लोगों को गलत सन्देश दे रहे है, कि बिना खड़ग बिना ढाल हमें आज़ादी मिली ? यह कोरा झूठ है, इस झुटका पर्दा फाश कौन करे, हमें बलिदान से आज़ादी मिली, न मालूम कितने लोगों के जाने गयी | 90 वर्ष की लड़ाई थी 2 =4 –दिनकी नहीं | तो सावरमती के संत का कमाल क्या था ?

हां यह तो ज़रूर है की जो सजा उन प्राण गवाने, और सजा भोगने वालों को मिली| उसका एक हिस्सा भी गाँधी और नेहरु को नहीं दीगयी, विचारशील लोगों जरुर समझ रहे होंगे कारण क्या है? मै इसका आंकड़ा दे रहा हूँ कहाँ कहाँ इन अंग्रेजोंका अत्याचार रहा और किस प्रकार के अत्याचार को भारत के लोगों ने सहन किया | यह मिथ्या प्रचार करने वालों का मुह बन्द करने को यह आंकड़ा पर्याप्त है | यह घटना किसके बाद कौन घटना घटती गयी और हादसा होता गया, नर संहार के साथ| 1 - इस बैरक पुर की घटना के बाद मानो क्रांति की बिगुल बजी, 2 - मेरठ की घटना 3 -फिर दिल्ली की घटना 4 –झाँसी की घटना 5 –झाँसीरानी का अमर बलिदान 6 –पंजाबमें क्रांति 7 –फिरोजपुर में क्रांति 8 – जालंधर, व फिल्लोर में क्रांति 9 –दिल्ली पर अत्याचार 10-राजा कुवरसिंह 11 –राजा अमर सिंह 12 –अवध की क्रांति 13 –बारी का युद्ध 14 –वीर नरपत सिंह 15-वीर अमर सिंह हरियाणा 16 –हरयाणा हांसी के वीर हुकमचंद 17 –वीर राजा नाहरसिंह 18 –वीरांगना देवी समां कौर 19 –जलियांवाला बाग 20 –राव तुलाराम 21 –वीर सावरकर 22 –वलवंत फडके 23 –गोपाल कृष्ण गोखले 24 –शंकर लिमये 25 –विष्णु गणेश पिगले 26 –लक्षमण कान्हेरे 27 –नारायण जोशी 28 –कृष्ण जी गोपाल कर्वे 29 –नारायण देश पाण्डेय 30 –रामचंद्र सोमन 31 –शिव राम राजगुरु 32 –पंजाब के वलिदान,सेनापति फूलासिंह 33 –नामधारीओं का बलिदान 34 –ला,हरदयाल 35 –लाला लाजपत राय 36 –मदनलाल धींगडा 37 –आमिर चाँद 38 –अवध विहारी 39-भाई बाल मुकुंद 40–सटी राम सखी 41–भाई परमानन्द 42 –तरुण वीर करतार सिंह 43 –हरनाम सिंह 44 –सोहनलाल पाठक 45 –वीर बंदासिंह 46 –मथुरासिंह 47 –भागसिंह 48 –भाई वतन सिंह 49 –बलवंतसिंह 50 –दिलीपसिंह 51–बन्तासिंह धामिया 52 –बरयामसिंह धुग्गा 53 –भाई मेवासिंह 54 –गेंदासिंह 55 – प० काशीराम 56 –रहमत अली शाह 57-मौलवी अहमदशाह 58 –वीरसिंह 59- रंगासिंह 60 –रामसिंह 61–उत्तमसिंह 61 –डॉ० अरुड्सिंह 62 –जगतसिंह 63 –भानसिंह 64 –उधम सिंह 65 –नंदासिंह 66 –खुशोराम 67 –सन्तासिंह 68 –किशनसिंह गर्गज्ज्य 69 कर्म सिंह 70 –धन्नासिंह 71 –बोमेली युद्ध का चार हुतात्मा 72 –प०जगतराम 73 –हरिकिशनसिंह 74-भगतसिंह 75 –सुखदेव 76 –वीर इन्द्रपाल77भगवतीशरण.दुर्गादेवी 78 –बबज्वाला सिंह 79 –राजस्थान के वलिदानी,ठा० केशरी सिंह बारहट 80 –कु०प्रतापसिंह 81 –ठा० जुरावार्सिंह 82 –वीर विजयसिंह पथिक 83 –अर्जुनलाल सेठी 84 –किसान आन्दोलन के शहीद वीर जुझार तेजा 85 –महाराजा किशनसिंह 86 –उ०प्र० के वलिदानी सूफी अम्बाप्रसाद 87 –गणेशशंकर विद्यार्थी 88 –चन्द्र शेखर आजाद 89 –प० रामप्रसाद बिस्मिल 90 –अश्फाख उल्लाह खान 91 –ठा०रोशनसिंह 92 –मन्मथ नाथ गुप्त 93 –रामदुलारे त्रिवेदी 94 –राज कुमार सिन्हा 95 –विजय कुमार सिन्हा 96 –प०गेंदा लाल 97 –शालिग्राम शुक्ल 98 –राजा महेन्द्र प्रताप 99 –रामचरण लाल शर्मा 100 –विष्णु शरण |

सिर्फ प्रमाण के लिए मै यह सौ नाम गिनाया हूँ. उन शहीदों के नाम गिनाकर समाप्त करना ही संभव नहीं अभी भारत के कई प्रान्त के शहीदों के नाम बाकी है | जिस में सबसे ज्यदा वलिदानी प्रान्त बंगाल है, अभी मै उनलोगों का नाम ही नहीं लिखा वह इसलिए की मै उसी प्रान्त से हूँ कही लोग यह कहने लगे की मै प्रन्तियेता का प्रचार कर रहा हूँ | मै जो नाम शहीदों का दिखाया हूँ अगर यह सत्य है तो इस सत्यता को न तो सोनिया जानती है और न हीं सोनिया पुत्र राहुल को मालूम | तो मिडिया जो सुना रही है उसमे क्या सत्यता है ? अगर यह झूठ है की सावर मति के संत की बिना खड़ग आज़ादी नहीं मिली, बल्कि हमारे पूर्वजों की खून से हमें आज़ादी मिली है | तो हमारे बच्चों को यह गलत और झूठी बातों को सुना कर हमारे इतिहास को किसलिए बिगाड़ा जा रहा है ? कौन जिम्मेदार, यह जवाबदेहि किसकी है ? हमारे बच्चों को यह सुनना था, की गाँधी के चरखे की घुन, घुन, से नहीं बन्दुक की धूं धूं से हमें यह आजदी मिली है | यह झूठे और मक्कार लोग हैं जो हमारे बच्चों को गलत पाठ पढ़ा रहे हैं, यह मर्यादा सिर्फ जाना और परखा नरेंद्र भाई मोदी, जो महान क्रांति कारी श्यामजी कृष्णवर्मा का अस्थिकलश लाये |

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