शुक्रवार, 5 दिसंबर 2014

श्री काल भैरव बटुक भैरव शाबर स्तोत्र मंत्र

ॐ श्री काल भैरव बटुक भैरव शाबर स्तोत्र मंत्र

ॐ अस्य श्री बटुक भैरव शाबर स्तोत्र मन्त्रस्य सप्त
ऋषिः ऋषयः, मातृका छंदः, श्री बटुक भैरव
देवता, ममेप्सित कामना सिध्यर्थे विनियोगः.

ॐ काल भैरु बटुक भैरु ! भूत भैरु ! महा भैरव
महा भी विनाशनम देवता सर्व सिद्दिर्भवेत .
शोक दुःख क्षय करं निरंजनम, निराकरम
नारायणं, भक्ति पूर्णं त्वं महेशं. सर्व
कामना सिद्दिर्भवेत. काल भैरव, भूषण वाहनं
काल हन्ता रूपम च, भैरव गुनी.
महात्मनः योगिनाम महा देव स्वरूपं. सर्व
सिद्ध्येत. ॐ काल भैरु, बटुक भैरु, भूत भैरु ! महा भैरव
महा भय विनाशनम देवता. सर्व सिद्दिर्भवेत.
ॐ त्वं ज्ञानं, त्वं ध्यानं, त्वं योगं, त्वं तत्त्वं, त्वं
बीजम, महात्मानम, त्वं शक्तिः, शक्ति धारणं
त्वं महा देव स्वरूपं. सर्व सिद्धिर्भवेत. ॐ काल भैरु,
बटुक भैरु, भूत भैरु ! महा भैरव महा भय विनाशनम
देवता. सर्व सिद्दिर्भवेत.
ॐ कालभैरव ! त्वं नागेश्वरम नाग हारम च त्वं वन्दे
परमेश्वरम, ब्रह्म ज्ञानं, ब्रह्म ध्यानं, ब्रह्म योगं,
ब्रह्म तत्त्वं, ब्रह्म बीजम महात्मनः, ॐ काल भैरु,
बटुक भैरु, भूत भैरु, महा भैरव महा भय विनाशनम
देवता! सर्व सिद्दिर्भवेत.
त्रिशूल चक्र, गदा पानी पिनाक धृक ! ॐ काल
भैरु, बटुक भैरु, भूत भैरु, महा भैरव महा भय विनाशनम
देवता! सर्व सिद्दिर्भवेत.
ॐ काल भैरव ! त्वं विना गन्धं, विना धूपम,
विना दीपं, सर्व शत्रु विनाशनम सर्व
सिद्दिर्भवेत विभूति भूति नाशाय, दुष्ट क्षय
कारकम, महाभैवे नमः. सर्व दुष्ट विनाशनम सेवकम
सर्व सिद्धि कुरु. ॐ काल भैरु, बटुक भैरु, भूत भैरु,
महा भैरव महा भय विनाशनम देवता! सर्व
सिद्दिर्भवेत.
ॐ काल भैरव ! त्वं महा-ज्ञानी , त्वं महा-
ध्यानी, महा-योगी, महा-बलि, तपेश्वर !
देही में सर्व सिद्धि . त्वं भैरवं भीम नादम च
नादनम. ॐ काल भैरु, बटुक भैरु, भूत भैरु, महा भैरव
महा भय विनाशनम देवता! सर्व सिद्दिर्भवेत.
ॐ आं ह्रीं ह्रीं ह्रीं ! अमुकम मारय मारय,
उच्चचाटय उच्चचाटय, मोहय मोहय, वशं कुरु कुरु.
सर्वार्थ्कस्य सिद्धि रूपम, त्वं महा कालम ! काल
भक्षणं, महा देव स्वरूपं त्वं. सर्व सिद्ध्येत. ॐ काल
भैरु, बटुक भैरु, भूत भैरु, महा भैरव महा भय विनाशनम
देवता! सर्व सिद्दिर्भवेत.
ॐ काल भैरव ! त्वं गोविन्दं गोकुलानंदम !
गोपालं गो वर्धनम धारणं त्वं! वन्दे परमेश्वरम.
नारायणं नमस्कृत्य, त्वं धाम शिव रूपं च. साधकं
सर्व सिद्ध्येत. ॐ काल भैरु, बटुक भैरु, भूत भैरु,
महा भैरव महा भय विनाशनम देवता! सर्व
सिद्दिर्भवेत.
ॐ काल भैरव ! त्वं राम लक्ष्मणं, त्वं श्रीपतिम
सुन्दरम, त्वं गरुड़ वाहनं, त्वं शत्रु हन्ता च, त्वं यमस्य
रूपं, सर्व कार्य सिद्धि कुरु कुरु. ॐ काल भैरु, बटुक
भैरु, भूत भैरु, महा भैरव महा भय विनाशनम देवता!
सर्व सिद्दिर्भवेत.
ॐ काल भैरव ! त्वं ब्रह्म विष्णु महेश्वरम, त्वं जगत
कारणं, सृस्ती स्तिथि संहार कारकम रक्त बीज
महा सेन्यम, महा विद्या, महा भय विनाशनम .
ॐ काल भैरु, बटुक भैरु, भूत भैरु, महा भैरव महा भय
विनाशनम देवता! सर्व सिद्दिर्भवेत.
ॐ काल भैरव ! त्वं आहार मध्य, मांसं च, सर्व दुष्ट
विनाशनम, साधकं सर्व सिद्धि प्रदा.
ॐ आं ह्रीं ह्रीं ह्रीं अघोर अघोर, महा अघोर,
सर्व अघोर, भैरव काल ! ॐ काल भैरु, बटुक भैरु, भूत
भैरु, महा भैरव महा भय विनाशनम देवता! सर्व
सिद्दिर्भवेत.
ॐ आं ह्रीं ह्रीं ह्रीं, ॐ आं क्लीं क्लीं क्लीं, ॐ आं
क्रीं क्रीं क्रीं, ॐ ह्रीं ह्रीं ह्रीं, रूं रूं रूं, क्रूम क्रूम
क्रूम, मोहन ! सर्व सिद्धि कुरु कुरु. ॐ आं
ह्रीं ह्रीं ह्रीं अमुकम उच्चचाटय उच्चचाटय, मारय
मारय, प्रूम् प्रूम्, प्रें प्रें , खं खं, दुष्टें, हन हन अमुकम
फट स्वाहा, ॐ काल भैरु, बटुक भैरु, भूत भैरु,
महा भैरव महा भय विनाशनम देवता! सर्व
सिद्दिर्भवेत.
ॐ बटुक बटुक योगं च बटुक नाथ महेश्वरः. बटुके वट
वृक्षे वटुकअं प्रत्यक्ष सिद्ध्येत. ॐ काल भैरु बटुक भैरु
भूत भैरु ! महा भैरव महा भय विनाशनम देवता सर्व
सिद्दयेत.
ॐ कालभैरव, शमशान भैरव, काल रूप कालभैरव !
मेरो वैरी तेरो आहार रे ! काडी कलेजा चखन
करो कट कट. ॐ काल भैरु बटुक भैरु भूत भैरु ! महा भैरव
महा भय विनाशनम देवता सर्व सिद्दयेत.
ॐ नमो हँकारी वीर ज्वाला मुखी ! तू दुष्टें बंध
करो बिना अपराध जो मोही सतावे, तेकर
करेजा चिधि परे, मुख वाट लोहू आवे. को जाने?
चन्द्र सूर्य जाने की आदि पुरुष जाने. काम रूप
कामाक्षा देवी. त्रिवाचा सत्य फुरे,
ईश्वरो वाचा . ॐ काल भैरु बटुक भैरु भूत भैरु !
महा भैरव महा भय विनाशनम देवता सर्व
सिद्दयेत.
ॐ कालभैरव त्वं डाकिनी शाकिनी भूत
पिसाचा सर्व दुष्ट निवारनम कुरु कुरु साधका-
नाम रक्ष रक्ष. देही में ह्रदये सर्व सिद्धिम. त्वं
भैरव भैरवीभयो, त्वं महा भय विनाशनम कुरु . ॐ
काल भैरु बटुक भैरु भूत भैरु ! महा भैरव महा भय
विनाशनम देवता सर्व सिद्दयेत.
ॐ आं ह्रीं. पश्चिम दिशा में सोने का मठ, सोने
का किवार, सोने का ताला, सोने की कुंजी,
सोने का घंटा, सोने की संकुली.
पहली संकुली अष्ट कुली नाग को बांधो.
दूसरी संकुली अट्ठारह कुली जाती को बांधो.
तीसरी संकुली वैरी दुष्ट्तन को बांधो,
चौथी संकुली शाकिनी डाकिनी को बांधो,
पांचवी संकुली भूत प्रेतों को बांधो,
जरती अग्नि बांधो, जरता मसान बांधो, जल
बांधो थल बांधो, बांधो अम्मरताई,
जहाँ जहाँ जाई,जेहि बाँधी मंगावू,
तेहि का बाँधी लावो. वाचा चुके, उमा सूखे,
श्री बावन वीर ले जाये, सात समुंदर तीर.
त्रिवाचा फुरो मंत्र , ईश्वरी वाचा. ॐ काल भैरु
बटुक भैरु भूत भैरु ! महा भैरव महा भय विनाशनम
देवता सर्व सिद्दयेत.
ॐ आं ह्रीं. उत्तर दिशा में रूपे का मठ, रूपे
का किवार, रूपे का ताला,रूपे की कुंजी, रूपे
का घंटा, रूपे की संकुली. पहली संकुली अष्ट
कुली नाग को बांधो. दूसरी संकुली अट्ठारह
कुली जाती को बांधो.
तीसरी संकुली वैरी दुष्ट्तन को बांधो,
चौथी संकुली शाकिनी डाकिनी को बांधो,
पांचवी संकुली भूत प्रेतों को बांधो,
जरती अग्नि बांधो, जरता मसान बांधो, जल
बांधो थल बांधो, बांधो अम्मरताई,
जहाँ जहाँ जाई,जेहि बाँधी मंगावू,
तेहि का बाँधी लावो. वाचा चुके, उमा सूखे,
श्री बावन वीर ले जाये, सात समुंदर तीर.
त्रिवाचा फुरो मंत्र , ईश्वरी वाचा. ॐ काल भैरु
बटुक भैरु भूत भैरु ! महा भैरव महा भय विनाशनम
देवता सर्व सिद्दयेत.
ॐ आं ह्रीं. पूरब दिशा में तामे का मठ, तामे
का किवार, तामे का ताला,तामे की कुंजी,
तामे का घंटा, तामे की संकुली.
पहली संकुली अष्ट कुली नाग को बांधो.
दूसरी संकुली अट्ठारह कुली जाती को बांधो.
तीसरी संकुली वैरी दुष्ट्तन को बांधो,
चौथी संकुली शाकिनी डाकिनी को बांधो,
पांचवी संकुली भूत प्रेतों को बांधो,
जरती अग्नि बांधो, जरता मसान बांधो, जल
बांधो थल बांधो, बांधो अम्मरताई,
जहाँ जहाँ जाई,जेहि बाँधी मंगावू,
तेहि का बाँधी लावो. वाचा चुके, उमा सूखे,
श्री बावन वीर ले जाये, सात समुंदर तीर.
त्रिवाचा फुरो मंत्र , ईश्वरी वाचा. ॐ काल भैरु
बटुक भैरु भूत भैरु ! महा भैरव महा भय विनाशनम
देवता सर्व सिद्दयेत.
ॐ आं ह्रीं. दक्षिण दिशा में अस्थि का मठ,
तामे का किवार,
अस्थि का ताला,अस्थि की कुंजी,
अस्थि का घंटा, अस्थि की संकुली.
पहली संकुली अष्ट कुली नाग को बांधो.
दूसरी संकुली अट्ठारह कुली जाती को बांधो.
तीसरी संकुली वैरी दुष्ट्तन को बांधो,
चौथी संकुली शाकिनी डाकिनी को बांधो,
पांचवी संकुली भूत प्रेतों को बांधो,
जरती अग्नि बांधो, जरता मसान बांधो, जल
बांधो थल बांधो, बांधो अम्मरताई,
जहाँ जहाँ जाई,जेहि बाँधी मंगावू,
तेहि का बाँधी लावो. वाचा चुके, उमा सूखे,
श्री बावन वीर ले जाये, सात समुंदर तीर.
त्रिवाचा फुरो मंत्र , ईश्वरी वाचा. ॐ काल भैरु
बटुक भैरु भूत भैरु ! महा भैरव महा भय विनाशनम
देवता सर्व सिद्दयेत.
ॐ काल भैरव ! त्वं आकाशं, त्वं पातालं, त्वं
मृत्युलोकं, चतुर भुजम, चतुर मुखं, चतुर बाहुम, शत्रु
हन्ता त्वं भैरव ! भक्ति पूर्ण कलेवरम. ॐ काल भैरु
बटुक भैरु भूत भैरु ! महा भैरव महा भय विनाशनम
देवता सर्व सिद्धिर भवेत् .
ॐ काल भैरव ! तुम जहाँ जहाँ जाहू, जहाँ दुश्मन
बेठो होए, तो बैठे को मारो, चालत होए
तो चलते को मारो, सोवत होए तो सोते
को मरो, पूजा करत होए तो पूजा में मारो,
जहाँ होए तहां मरो वयाग्रह ले भैरव दुष्ट
को भक्शो. सर्प ले भैरव दुष्ट को दसो. खडग ले
भैरव दुष्ट को शिर गिरेवान से मारो. दुष्तन
करेजा फटे. त्रिशूल ले भैरव शत्रु चिधि परे. मुख
वाट लोहू आवे. को जाने? चन्द्र सूरज जाने
की आदि पुरुष जाने. कामरूप कामाक्षा देवी.
त्रिवाचा सत्य फुरे मंत्र ईश्वरी वाचा. ॐ काल
भैरु बटुक भैरु भूत भैरु ! महा भैरव महा भय विनाशनम
देवता सर्व सिद्धिर भवेत् .
ॐ काल भैरव ! त्वं. वाचा चुके उमा सूखे, दुश्मन मरे
अपने घर में. दुहाई भैरव की. जो मूर वचन झूठा होए
तो ब्रह्म का कपाल टूटे, शिवजी के तीनो नेत्र
फूटें. मेरे भक्ति, गुरु की शक्ति फुरे मंत्र
ईश्वरी वाचा. ॐ काल भैरु बटुक भैरु भूत भैरु !
महा भैरव महा भय विनाशनम देवता सर्व
सिद्धिर भवेत् .
ॐ काल भैरव ! त्वं.भूतस्य भूत नाथासचा,भूतात्म
ा भूत भावनः, त्वं भैरव सर्व सिद्धि कुरु कुरु. ॐ
काल भैरु बटुक भैरु भूत भैरु ! महा भैरव महा भय
विनाशनम देवता सर्व सिद्धिर भवेत् .
ॐ काल भैरव ! त्वं ज्ञानी, त्वं ध्यानी, त्वं
योगी, त्वं जंगम स्थावरम त्वं सेवित सर्व काम
सिद्धिर भवेत्. ॐ काल भैरु बटुक भैरु भूत भैरु !
महा भैरव महा भय विनाशनम देवता सर्व
सिद्धिर भवेत् .
ॐ काल भैरव ! त्वं वन्दे परमेश्वरम, ब्रह्म रूपम,
प्रसन्नो भव. गुनी महात्मानं महादेव स्वरूपं सर्व
सिद्दिर भवेत्.

प्रयोग :
१. सायंकाल दक्षिणाभिमुख होकर पीपल
की डाल वाम हस्त में लेकर, नित्य २१ बार पाठ
करने से शत्रु क्षय होता है.
२. रात्रि में पश्चिमाभिमुख होकर उपरोक्त
क्रिया सिर्फ पीपल की डाल दक्षिण हस्त में
लेकर पुष्टि कर्मों की सिद्धि प्राप्त होती है,
२१ बार जपें.
३. ब्रह्म महूर्त में पश्चिमाभिमुख तथा दक्षिण हस्त
में कुश की पवित्री लेकर ७ पाठ करने से समस्त
उपद्रवों की शांति होती है.

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